एक संक्षिप्त परिचय

नगर पंचायत बड़कोट का गठन वर्ष 1989 में हुआ था, जिसका उच्चीकरण अगस्त 2015 में नगर पालिका के रूप में किया गया। लगभग 9 वर्ग किमी क्षेत्रफल में स्थित नगर पालिका परिषद बड़कोट जिला मुख्यालय से 86 किमी की दूरी पर यमुना नदी के किनारे राजा सहस्त्रबाहु की पावन धरती पर बसा हुआ है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक वातावरण के कारण यह नगर यात्रियों और स्थानीय लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। चार धाम यात्रा के प्रथम तीर्थ स्थल मां यमुना के विश्व प्रसिद्ध धाम का यह पहला पड़ाव माना जाता है। बड़कोट से यमुनोत्री धाम की कुल दूरी लगभग 47 किमी है, जिसमें 42 किमी सड़क मार्ग और शेष 5 किमी पैदल मार्ग शामिल है, जहां श्रद्धालु मां यमुना के जयकारों के साथ अपनी यात्रा पूर्ण करते हैं। नगर पालिका परिषद बड़कोट के अंतर्गत कुल 7 वार्ड आते हैं और वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 6627 है। यमुना घाटी के गांवों के लिए बड़कोट एक प्रमुख केंद्र है, जहां लोग अपने दैनिक व्यवसाय, शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्भर रहते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत पूरे देश को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया, जो पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बड़कोट के लिए एक बड़ी चुनौती थी। नगर पालिका परिषद द्वारा किए गए सर्वे में 450 से अधिक ऐसे परिवार मिले जिनके पास पक्के मकान और शौचालय दोनों नहीं थे। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए माननीय अध्यक्ष के नेतृत्व में सबसे पहले राजीव आवास योजना के तहत 396 परिवारों के लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई और स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया गया। भूमि की कमी, आर्थिक कमजोरी और लोगों की मानसिक तैयारी की कमी जैसी बाधाओं के बावजूद निकाय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाए, नुक्कड़ नाटक, स्कूलों और बाजारों में रैलियों के माध्यम से लोगों को शौचालय निर्माण और उपयोग के लिए प्रेरित किया। इसके परिणामस्वरूप पहाड़ी क्षेत्र में 8 सीटों वाले सामुदायिक और 7 सीटों वाले सार्वजनिक फैब्रिकेटेड शौचालयों के साथ 50 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया और गांधी जयंती के शुभ अवसर पर नगर पालिका बड़कोट को पूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया।

Barkot Nagar